Tuesday, October 2, 2018

लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में 10 अनोखी बातें

                   लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में 10 अनोखे तथ्य 
दोस्तों आज लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती है. दोस्तों 2 अक्टूबर 1904 को लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म वाराणसी में एक हिन्दू परिवार में अपने नाना और नानी के यहां हुआ था। शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। नेहरू जी की मृत्यु के बाद उन्हें भारत देश की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। शास्त्री जी का दिया गया नारा "जय जवान, जय किसान" आज भी बच्चे बच्चे के मुंह पर होता है। शास्त्री जी सबसे ज्यादा अपनी सादगी के लिए जाने जाते है। 1965 में में जब पाकिस्तान ने भारत को कमज़ोर समझ हमला कर दिया था तो वो शास्त्री जी ही थे जिनके नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को नाकों चने चबवा दिए थे।
दोस्तों, शास्त्री जी की मृत्यु 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में हुई थी। शास्त्री जी की का निधन आज तक एक रहस्य बना हुआ है। ऐसे सादगी भरे नेता को हमारा कोटि कोटि नमन है। आइये जानते है शास्त्री जी के जीवन के बारे में 10 ऐसी बाते जिससे हम सब बहुत कुछ सीख सकते हैं।


 1. दोस्तों, शास्त्री जी के ऊपर से माँ-पिता का साया बचपन में ही हट गया था. उनका परिवार एक गरीब परिवार था और पढ़ने लिखने के ज्यादा संसाधन न थे. इसके बावजूद शास्त्री जी नदी तैर कर पढ़ने जाते थे. हमें इससे ये सीख मिलती है की इंसान को विषम परिस्थितयों में भी हार नहीं माननी चाहिए।

2.शास्त्री जी के पोते अनिल शास्त्री के बेटे आदर्श शास्त्री ने अपनी एप्पल कंपनी में नौकरी छोड़ कर 2014 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली थी. 

3. शास्त्री जी की शादी मार्च 1928 में हुई थी. शादी में शास्त्री जी ने दहेज़ के तौर पर एक चरखा और कुछ कपडा लिया था. 

4.भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग शास्त्री जी ने ही आरम्भ कराया था.

5. काशी विश्विद्यालय से शास्त्री की उपाधि मिलते ही उन्होंने पीढ़ियों से चले आ रहे जाति सूचक शब्द को हटवाकर नाम के पीछे "शास्त्री" लगवा लिया।

6. शास्त्री जी ने रेलवे में थर्ड क्लास श्रेणी का आरम्भ करवाया था इससे आम लोगों को बहुत राहत मिली थी. 

7. आज़ादी की लड़ाई के दौरान "जय जवान, जय किसान" का नारा शास्त्री जी ने ही दिया था.

8. शास्त्री जी ने महिलाओ की सुविधा का बहुत ध्यान रखा था. परिवहन में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आरम्भ शास्त्री जी ने ही करवाया था.

9. 11 जनवरी 1966 को शास्त्री जी का निधन चीन के ताशकंद में हो गया था. उनका निधन आज तक एक रहस्य है.

10. मरणोपरांत शास्त्री जी को "भारत रत्न" का सम्मान दिया गया था.

शास्त्री जी हमेशा से लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं और रहेंगे। उनका सादगी भरा जीवन हमें ये सिखाता है की आप जीवन में कितनी भी ऊंचाइयों में क्यों न पहुँच जाओ आपको अपना सादापन नहीं छोड़ना चाहिए।
राजनीति का हिस्सा होते हुए भी वो राजनीति से अछूते रहे. ऐसे महान व्यक्तित्त्व को हमारा नमन है.

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