Sunday, October 7, 2018

इन पांच बातों से जाने आपका दोस्त सच्चा है या नहीं।

                          अपने दोस्त में ये पांच बाते ज़रूर परख लें
दोस्तों, ज़िंदगी हमें बहुत सिखाती है. कुछ चीज़ें अच्छी होती हैं और कुछ बुरी। हम अपनी ज़िंदगी में हज़ारों लोगों से मिलते है.  उनमे से कुछ अपने होते और कुछ से हम मिलकर उनसे आगे बढ़ जाते हैं. ऐसे ही रिश्ते- नाते होते है. कुछ हमें जन्म के साथ ही मिल जाते है, जैसे की माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-चाची इत्यादि और कुछ हम खुद बनाते हैं. जैसे की दोस्ती, पति-पत्नी आदि. हमें सभी रिस्तों को यहाँ निभाना पड़ता है. आज हम बात करेंगे दोस्ती के रिश्ते की। ये रिश्ता सब रिश्तों में खास है। दोस्ती ही ऐसा रिश्ता है जो हम जीवन में सबसे पहले खुद चुनते हैं। जो हमारे काम आता है, हमारी रेस्पेक्ट करता है और हमारे विचारों को सम्मान देता है, हम उसे अपना दोस्त बना लेते हैं। दोस्ती अच्छे लोगों से हो तो जीवन अच्छा रहता है और दोस्ती बुरे लोगों से हो तो अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। किसी के लिए ये जानना अत्यंत आवश्यक है कि उसका दोस्त सच्चा है या नही।

सच्ची गवाही तो खुद का दिल ही दे सकता है पर फिर भी कुछ परिस्थितियों में नापकर हम ये पता लगा सकते हैं कि दोस्ती सच्ची है कि नहीं। आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको ऐसे पांच बिंदु बताने जा रहे हैं जिससे आप ये जान सकते हैं कि आपका दोस्त सच्चा है या नही। ये आपको कहीं किसी किताब में नहीं मिलेंगे। ये कई लोगों से बात करने के पश्चात अनुभव से निकले हैं।


1.दोस्त की आदतें: दोस्तो पहली कसौटी यही है कि आपको अपने दोस्त की आदतों के बारे में जानना चाहिए। वो सच बोलता है या झूठ, जीवन जो लेकर उसका नज़रिया क्या है। आपको ये ज़रूर देखना चाहिए  की जिससे आपकी मित्रता है कहीं उसके किसी प्रकार के गलत शौक़ तो नही है।आपको ये भी जानना चाहिए कि जो आदतें आप में हैं क्या वही आपके दोस्त में हैं या नहीं। क्योंकि समान आदतों वाले दोस्तों की दोस्ती अक्सर सच्ची हुआ करती है, मतलब दोस्ती सफल होने की संभावना यहां बहुत प्रबल है।



इसलिए अपने मित्र की आदतें जानना और उसे परखना बहुत ही आवश्यक है। अगर ऐसा कोई समान आदत वाला दोस्त आपको मिल जाये तो उसे बिल्कुल भी मत छोड़िएगा दोस्तों क्योंकि ऐसे दोस्त बहुत कठिनाई से मिलते है और आप भी ऐसे लोगों के साथ ईमानदार रहें।


2.आपके कठिन समय में दोस्त का बर्ताव: दोस्तों ये ऐसा पैमाना है जिससे आप तुरंत ये तय कर सकते हैं कि आपकी दोस्ती सच्ची है कि नही। कहतें है दोस्तों की, असली मित्र वही होता है जो आपके बुरे वक्त में काम आए या फिर सही मित्र की पहचान आपके बुरे वक़्त में होती है। तो जब आपका कठिन समय हो तो आप देख लें कि जिस पर आप इतना भरोसा करते हैं  वो आपका साथ दे रहा है कि नहीं। अगर आपके बुरे वक्त में आपका दोस्त आपसे कुछ कटने लगा है तो समझ जाइये की वो आपका दोस्त कभी था ही नही। इसके विपरीत यदि आपका मित्र आपकी और ज्यादा फिक्र करने लगा है तो ऐसे दोस्त को कभी मत छोड़िये क्योंकि यही आपका सच्चा दोस्त है।
दोस्तों, आप ही सोचिये की जिस समय आपको अपने दोस्त की सबसे ज्यादा ज़रूरत हो और वो उसी समय आपसे दूरी बना ले तो ऐसा दोस्त किस काम का। ऐसे लोगों को अपना भूतकाल समझ कर भूल जाइए और अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाये।


3.आपके मित्र का आपके लिए त्याग: मान लीजिए कि आपको और आपके दोस्त को कोई भी समान चीज़ पसंद है। वो वस्तु संख्या में केवल एक ही है। क्या आपका मित्र आपके लिए त्याग कर रहा है। दोस्तों, यहाँ वस्तु से मतलब छोटी चीजों से नही है। यहाँ मतलब बड़ी और अनमोल चीजों से। आपको ये समझना होगा कि जिस वस्तु की आपको सख्त जरूरत है और आपका मित्र उसे त्यागने के लिए ही तैयार नहीं है तो आपको समझ जाना चाहिए कि दोस्ती के धागे में कहीं न कहीं गांठ है और ये धागा ज्यादा लंबे समय तक टिका रहने वाला नहीं है।
ऐसी स्थिति में आपको इस मित्र से सतर्क रहने की ज़रूरत है और बेहतर है कि आप अपने आप को इससे दूर ही कर लें। जीवन में अच्छे लोगों को पहचानना सीखें और उनकी कद्र करें। दिखावे के रिश्तों की उम्र बहुत कम होती है फ्रेंड्स।


4. आप और आपका दोस्त जब साथ होते हैं तब का माहौल: ये बहुत ही मुख्य है। मैं अक्सर देखता हूँ दोस्तों, की कुछ लोग जब भी मिलेंगे तो हमेशा लड़ने लगते है। अभद्र भाषा का प्रयोग भी करते हैं। जब भी वो साथ होते हैं तो माहौल एक दम खराब हो जाता है। अगर मित्र आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है तो आपको रुक कर मनन करने की ज़रूरत है। कभी भी दोस्ती के रिश्ते को सिर्फ इस लिए नही निभाना चाहिए कि दोस्त है, बचपन से इत्यादि। अगर आप दोनों एक दूसरे के विचारों से सहमत नही हैं तो दोस्ती खत्म कर देना ही अच्छा है। समय गवाने से कोई फायदा नही और वक़्त कीमती होता है। लड़ाई झगड़े से अच्छा है अपना दिमाग किसी अच्छे काम में लगाये।
माहौल आपके दिमाग में बहुत व्यापक असर डालता है। अगर आपके दोस्त से अक्सर आपका झगड़ा ही होता है या फिर विचार मेल ही नही खाते तो आपका दोस्त आपके लिए नही बना है.

5.आपकी गैर हाज़िरी में आपके दोस्त की आपके बारे में राय: अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु। कहते हैं की सबसे अच्छा दोस्त वही है जो आपकी गैर मौजूदगी में आपके बारे में किसी के द्वारा गलत कहे जाने पर आपका पक्ष ले और आपको डिफेंड करे। मान लीजिये कोई आपकी बुराई कर रहा है और उनके साथ आपका दोस्त भी है। अब वो दोस्त यदि आपका पक्ष ले रहा है और ये कह देता है कि नही ऐसा नही है, मेरा मित्र हरगिज़ ऐसा नही है। तो ऐसा दोस्त लाखों में एक है। इनके विपरीत वो भी उनके साथ आपकी बुराई मे उनका साथ दे रहा है तो ऐसा दोस्त किसी काम का नही है।
जो दोस्त खुल कर आपका पक्ष तक न ले पाए तो ऐसी दोस्ती को त्यागना ही बेहतर है। ज़िन्दगी मे और लोग भी होंगे आपकी कद्र करने वाले , ऐसे लोगों को पहचाने और उनका साथ दें। यही दोस्ती का सबब है।

फ्रेंड्स, वाकई दोस्ती की पहचान बहुत ज़रूरी है। ज़िन्दगी दोस्तों से बहुत आसान हो जाती है अगर वो सच्चें हो। और दोस्त सच्चे न हों तो उन्हें पचाने और आज ही उनसे किनारा कर लें.

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मिलते हैं दोस्तों अगली पोस्ट में।



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