Thursday, October 4, 2018

गीता के पांच सबसे शक्तिशाली ज्ञानपूर्ण श्लोक जो जीवन बदल देंगे

       भागवत गीता के पांच श्लोक आपके जीवन के लिए बहुत उपयोगी है!

Hi Doston! अगर हम आज की दुनिया की बात करें तो आज सब कुछ बहुत तेज़ है. सभी आज अपनी अपनी ज़िंदगी में सफलता का परचम लहराना चाहते हैं. विलासिता की दौड़ दोस्तों ऐसी है की इंसान खुद का मूल उद्देश्य भूल सा गया है. बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के बीच में एक अजीब से घुटन है. रिश्तों तो एक तरफ तार तार हो ही रहे हैं, दूसरी तरफ इंसान की हैवानियत से न्यूज़ पेपर और चैनल्स भरे पड़े रहते हैं.  आज आप खुद से पूछ कर देखिये क्या आप वाकई खुश हैं? अगर जवाब हाँ हैं तो ज़रूर आप विलासिता की इस दौड़ से अभी भी अछूते हैं.  और अगर जवाब ना है तो आपको कुछ पल रुक कर खुद के लिए सोचने का समय है.
दोस्तों, हमेशा ये याद रखिये की हम अपने साथ कुछ भी साथ नहीं ले जाने वाले। हम जैसे खाली हाँथ आये थे वैसे ही हमें जाना होगा। पैसे के पीछे सिर्फ इतना ही भागें जितने में आपकी ज़रूरतें पूरी हो सकें। हमारे रिश्ते, दोस्त और सगे-सम्बन्धी यही हमारी असली दौलत है. अपने भारत की संस्कृति भी आध्यात्मिक ही रही है. हमारे वेद और पुराण हमें अच्छे और बुरे का ज्ञान बखूबी करवा देते हैं. हमारे यहाँ कई ऐसे ग्रन्थ की रचना हुई है जिनसे इंसान खुद के लिए बहुत कुछ सीख पाता है.

एक तरफ जहाँ हमें महाभारत राजनीति और रिश्तों के खेल बाखूबी समझा देती है, वहीँ रामायण हमें एक ऐसे जीवन के बारे में बताती है जिससे हम मान-मर्यादा, गुरु-शिष्य, अहंकार का नाश आदि चीज़ें सीख सकते हैं. पुराण हमें हर कठिन से कहतीं समस्या का हल बड़ी ही सालता से समझा देते हैं. हमारे यहाँ ऋषि-मुनि, महापुरुषों ने समय समय पर आ कर भारत की वृहद संस्कृति को पूरी दुनिया में फ़ैलाने का काम तो किया ही है साथ ही इसे आज तक लोगों के दिलों में ज़िंदा भी रखा है.

आज हम बात करेंगे गीता की. गीता में श्री कृष्णा भगवान ने कुरक्षेत्र के मैदान में हुए महाभारत में अर्जुन को इस जीवन की सच्चाई से रूबरू कराया था. उन्होंने अर्जुन को इस जीवन के ऐसे ऐसे गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठाया था, जो की इस कायनात के रहने तक सच ही रहेंगे। दोस्तों हम भी भगवत गीता के उन श्लोकों से बहुत कुछ सीख सकते हों. आज मैं ऐसे पांच श्लोक यहाँ पर आज के जीवन के सापेक्ष में बताने वाला हूँ जो आपके जीवन में बहुत हद तक परिवर्तन लाएंगे बशर्ते आप उन्हें अपने जीवन में उतार लें.



1. यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वश: |
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ||
अर्थ: जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को संकुचित कर के खोल के अंदर कर लेता है उसी तरह जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को इंद्रीविषिओं से खींच लेता है, वह पूर्ण चेतना में दृढ़ता पूर्वक स्थिर होता है.

सीख: दोस्तों, कहते हैं जिसने अपनी इन्द्रियों पर काबू पा लिया इसे कोई नहीं हरा सकता है. इंसान हारता हैं क्यूंकि वह अपनी इन्द्रियों को काबू नहीं कर पाता। यहाँ इन्द्रियों से मतलब से आपके शौक़, पसंद और न पसंद से है. अगर आपको शराब पीने की लत है और आप उसे चाह कर भी नहीं छोड़ पा रहे हैं तो दोस्त आप अपनी इन्द्रियों के बस में. आप कभी सफल नहीं हो सकते हों. अगर आप का वजब बढ़ रहा है और आप का अपनी जीभ पर कण्ट्रोल नहीं है दोस्त आपका वजन कभी भी नही घट सकता। तो यहाँ कहने का तात्पर्य यही है की आपका खुद पर कण्ट्रोल होना चाहिए। आपका मन आपके के वश में है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। 

2. सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो,मत्त: स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च |
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो,वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ||
अर्थ: मैं प्रत्येक जीव के हृदय में आसीन हूँ, और मुझसे ही स्मृति ज्ञान तथा विस्मृति होती है. मैं ही वेदों के द्वारा जानने योग्य हूँ.  निसंदेह मैं वेदांत का संकलन करता तथा समस्त वेदों का जानने वाला हूँ.

सीख: यहाँ पर स्वयं श्री कृष्णा जी बता रहे हैं की वो प्रत्येक जीव के हृदय में आसीन है. तो मित्रों जब हम सब के अंदर स्वयं ईश्वर का वास है तो फिर हम इंसाओं ने इतनी दीवारे क्यों खींच रखी है. असल में हम धर्म के पीछे लड़ते तो बहुत हैं. दंगा फसाद तक कर देते हैं. पर जब इसे मानने की बात आती है तो बगले झाकंने लगते हैं. यहाँ अगर हम प्यार और मोहोब्बत से रहना सीख ले तो इंसान की आधी समस्या का हल ऐसे ही हो जाएगा। तो आज से इस सीख को अपने जीवन में उतार लें और अपने आस-पास,सगे-सम्बन्धियों से प्यार भावना से इस्तकबाल करें।



3. अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रित: |
सर्वकर्मफलत्यागं तत: कुरु यतात्मवान् ||
अर्थ: कित्नु यदि तुम मेरे इस भावनामृत में, कर्म करने में असमर्थ हो तो, तुम अपने कर्म के समस्त फलों को त्याग कर कर्म करने का तथा आत्म्स्थिर होने का प्रयत्न करो!

सीख: हम दोस्तों कोई भी कार्य स्टार्ट करने से पहले सोचते रहते हैं की यार ऐसा हुआ तो कहीं वैसा न हो जाये, ये करूँगा तो वो वैसा न हो जाए , मतलब कर्म हमने किया नहीं और फल की  इच्छा करने लगे. श्री कृष्णा जे साफ़ कहते हैं की तू फल की इच्छा मत कर बस कर्म किये जा. ये श्लोक हमरे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण रोले प्ले करता है. आधे से ज्यादा स्टार्ट-अप ऐसी लिए नहीं शुरू हो पाते क्यंकि आदमी भविष्य को ले कर अगर मगर में पड़ा रहता है. 
दोस्तों ये ठान लीजिये की आपको जो भी करना है आज करना है. आज नहीं तो कभी नहीं। कल कभी नहीं आता!

4. अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मण: फलम् |
भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु सन्न्यासिनां क्वचित् ||
अर्थ: जो त्यागी नहीं है, उसके लिए इच्छित, अनिच्छित तथा मिश्रित, ये तीनो प्रकार कर्म फल मृत्यु बके बाद मिलते हैं. लेकिन जो सन्यासी हैं, उन्हें ऐसे फल का सुख दुःख नहीं भोगना पड़ता!

सीख: वास्तव में दोस्तों, हर सफलता के लिए त्याग बहुत ज़रूरी है. और त्याग करने वाला ही सन्यासी कहलाता है. मान लीजिये आपके के शहर में पढ़ने के लिए कोई अच्छा कॉलेज नहीं है. आप अपनों के मोह में घर छोड़ कर ही न जाएँ तो क्या आप कभी डिग्री पा पाएंगे? नहीं! अगर कोई विद्यार्थी आलस्य का त्याग न करें तो क्या वो सफल हो सकता है? जी नहीं। त्याग ही सफलता की निशानी है. आपको अनेक तरह के त्याग अपने जीवन में करने पड़ते हैं. कष्ट सहना पड़ता है. तो दोस्तों आज से ही आप तप-त्याग में लग जाइये और अपने सपनो को पा लीजिये!

5. नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मण: |
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मण: ||
अर्थ: अपना नियत कर्म करो, क्यूंकि कर्म न करने की उपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है. कर्म के बिना तो शरीर निर्वाह भी नहीं हो सकता।
सीख: पांचवा और अंतिम। दोस्तों वास्तव में करना ही इंसान का सबसे बड़ा धर्म है. अगर कर्म ही नहीं किया तो क्या किया। आपको अपने सपने को पाने के लिए वैसा कर्म करना होगा। जी तोड़ मेहनत करनी होगी। यहाँ श्री कृष्णा साफ़ समझा रहे हैं की कुछ भी न करने से तो श्रेष्ठ कुछ कर ही लेना है. सही समय दोस्तों कभी नहीं आता. आपको ऐसी समय को सही बनाना पड़ता है वो भी अपने कर्म से. 
तो दोस्तों अपने कर्म पर भरोसा रखिये और ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहिये।

ये पांच श्लोक मुझे बहुत प्रभावित करते है और आज की ज़िंदगी में एकदम फिट बैठते है. मैंने अपनी ज़िंदगी मे इनसे बहुत कुछ सीखा है. क्या ये श्लोक और इनकी सीख आपको प्रभावित कर पायी? हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताइयेगा।

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मिलते हैं अगली पोस्ट में!

2 comments:

  1. Really inspiring words of wisdom to guide today's man to live a contended life.

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  2. Thank you so much for giving your precious time to read our blog. Please keep following our blog.

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