Tuesday, September 25, 2018

तेरी यादें- अपने सनम की याद में: एक कविता

                                                                तेरी यादें 
Hi Doston! ज़िंदगी में प्यार बहुत ही आवश्यक है. हमारी अपनी संस्कृति हमें प्यार करना सिखाती है. विभिन्नता में एकता वाला देश है हमारा! अनेक धर्म और भाषाओँ के बावजूद हमें प्यार ही है जो एक साथ बांधे रखता है. हर इंसान अपनी ज़िंदगी में किसी न किसी से तो प्यार करता ही है. प्यार के ऊपर न जाने कितने किस्से बने है और ना जाने कितनी कहानियां। अपना बॉलीवुड भी सदा प्यार के रंगों में रंगा रहा है.

बड़े बड़े गीतकारों ने प्यार पर एक से एक गाने लिखे। गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ में उन्हें गया. कुछ गाने तो हमारे इतने करीब हो जाते हैं की हम जब उनको गाते हैं तो होने प्रीतम की यादों में खो जाते हैं. यहाँ अगर संगीतकारों की बात न की जाए तो बड़ी बेईमानी होगी। संगीत ही होता है जो को एक गाने को प्यार भरा अंदाज़ देता है. कुछ कलाकार प्यार को इतने अच्छे से दर्शाते हैं की वो प्यार के आइकॉन ही बन जाते हैं.

अब कविताएं एक अलग ही रूप होती हैं प्यार का. कविता अगर प्यार पर हो तो आप के मन पर कोमल असर छोड़ जाती है. अपनी प्रीतम की तारीफ, याद, बेवफाई पर आज तक हज़ारों कविताये लिखी गयी हैं. बहुत बड़े बड़े कवियों ने अपनी लेखनी से प्यार के शब्दों को सुसज्जित किया है. 

यहाँ दोस्तों मैं खुद की लिखी एक कविता " तेरी यादें " आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. आशा करता हूँ आपकी मेरी लेखनी पसंद आएगी। भाषा यहाँ हिंदी रहेगी।



 कविता की पृष्ठभूमि: यहाँ एक लड़का जिससे उसकी प्रेमिका  बहुत प्रेम करती थी, वो अब नहीं रहा है. असीम प्रेम तो दर्शाती ये कविता है. तेरी यादें!

दिन मैंने गिने नहीं, राते मैंने गिनी नहीं,
एक एक रात मैंने आंसुओ से भीग भीग कर है काटी,
वादे करते थे जन्मों का प्रीतम,
कर गए दिल में तुम, सदा के लिए मातम,
अपनी चौकठ पर बैठ बैठे ,
क्यों तेरी आने की हर राह ताकू मैं,
तू नहीं आएगा कभी ,मैं तो मान भी गयी,
नादान दिल अब भी तुझे खुद में बसाये धड़कता है,
तेरे ही रंगों से मैं सदा के लिए रंगी हूँ,
बाते तेरी सोच-सोच झूठा ही हँस लेती हूँ,
देखो, नादानी मेरी कितनी ही नादान है,
भूलती नहीं तुझे मैं, कहती हूँ यादों से दिल परेशान है,
हल लफ्ज़ में आज तेरा ही नाम है,
मेरे ज़िंदगी तेरी बातों का एक पैगाम है,
रोशन है आज गली में हर आशियाना,
तेरी यादों से बुझा रखा है मैंने अपने दिल का तराना,
बेसुध हुई, गुमसुम हुई, मुरझा सी गयी मैं,
धड़कनो को गिन गिन अपने दिन काट रही मैं,
क्यों तू कुछ पल के लिए लौट नहीं आता,
क्यों तू अपनी यादें ले नहीं जाता,
काश की तुझमे कुछ बुराइयां होती,
उन्ही को सोच कर तुझसे नफरत कर लेती,
पर अब क्या करूँ तेरी  इन यादों क्या?
कब तक बोझ मैं उठाऊं तेरी उन हसीं बातों का,
मेरी हालत काश तू जान पाता,
कितना चाहती हूँ तुझे ये तू समझ पाता,
एक ही रास्ता नज़र आता मुझे तुझसे मिलने का,
इन यादों हमेशा के लिए तुझे सौपने का,
ज़रूर आउंगी मैं तुझसे मिलने प्रीतम,
एक एक बात का हिसाब लुंगी मेरे हमदम,
आज उफान पर हैं मेरे ज़ज़्बात सनम,
इस शाम में है कुछ अजीब सूना पन,
खींच रही तेरी ओर मुझे हर एक सांस प्रीतम,
"तेरी यादें", लिए आ रही तेरी ज़िंदगी  मेरे सनम....
-धर्मेंद्र

दोस्तों, आपको हमारी ये कविता कैसी लगी कमेंट बॉक्स में ज़रूर ज़रूर बताइयेगा। आपके कमेंट्स ही हमें और आगे लिखने के लिए प्रेरित करते हैं.

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