Wednesday, September 26, 2018

प्रेरक कहानी: माया रूपी डायन

           कहानी: लालच में-"न माया मिली न राम"  
दोस्तों आज हम आपके लिए एक प्रेरणा से भरपूर कहानी ले कर आये हैं. इसे आप स्वयं भी पढ़िए तथा अपने परिवार के साथ भी शेयर करें।

किसी गाँव में दो भाई रहते थे. बड़े भाई का नाम हीरा था और छोटे भाई का नाम मोती था. दोनों भाइयों बहुत प्यार था. घर में भी खुशहाली थी. उस साल गाँव में आकाल पड़ गया. पूरा गाँव आकाल से त्राहि-माम कर रहा था. हीरा मोती का घर भी जैसे तैसे गुजारा कर रहता। हीर  और मोती से अपने घर की हालत देखी न गयी. दोनों ने विचार विमर्श कर के शहर की ओर जाने का फैसला किया। अपने घर से रास्ते का खाना पीना ले कर दोनों शहर की ओर चल पड़े.




शहर का रास्ता एक घने जंगल से हो कर गुजरता था. दोनों भाई एक साथ अपनी मंजिल की ओर चले जा रहे थे. रास्ता लम्बा था सो उन्होंने एक पेड़ के नीचे विश्राम करने का फैसला किया। दोनों भाई विश्राम करने बैठे ही थे की इतने में एक साधू वहां पर भागता हुआ आया. साधू कुछ हांफा हुआ और डरा सा था.

मोती ने साधू से उसके डरने का कारण पूछा। साधू ने बताय की आगे के रास्ते में एक डायन है. उस साधू ने उन्हें आगे जाने से मना कर दिया। इतना कह कर साधू अपने रास्ते को लौट गया. हीरा और मोती साधू की बातों को सुन कर असमंजस में पड़ गए. दोनों आगे जाने से डर रहे थे. दोनों के मन में घर लौटने जाने का विचार आया, लेकिन घर की हालत याद करके उन्होंने आगे बढ़ने का निश्चेय किया। दोनों भाई कुछ देर वहां रूक कर आगे बढ़ने लगे.

आगे का रास्ता और भी घना था और वे दोनों बहुत डरे हुए भी थे.  कुछ दूरी और चलने के पश्चात दोनों को एक थैला पड़ा हुआ सा दिखाई दिया। दोनों भाई डरते हुए उस थैले के पास पहुंचे। उन्होंने उस थैले को खोल कर देखा तो उन दोनों भाइयों की ख़ुशी का कोई ठिकाना ही न रहा. उस थैले में बहुत सारे सोने के सिक्के थे. सिक्के इतने सारे थे की दोनों की ज़िंदगी आसानी से पूरे ऐश-ओ-आराम से कट सकती थी. दोनों भाई ख़ुशी से झूम रहे थे.

मोती ने उस साधु को भी खूब कोसा जो उन्हें आगे डायन होने की बात कह रहा था. दोनों को अपने आगे बढ़ने के फैसले पर गर्व हो रहा था. हीरा ने उस साधू को मुर्ख भी कहा. अब दोनों भाइयों ने एक पेड़ के नीचे बैठ भोजन करने का निश्चेय किया और वही पर उन सिक्कों को बराबर बराबर बाँट लेने का फैसला किया।

दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गए. हीरा ने अपने छोटे भाई मोती से  कहा की वह पास के कुएं से जा कर पानी ले आये, ताकि भोजन आराम से किया जा सके. मोती पानी लेने के लिए चल पड़ा. मोती रास्ते में चलते चलते सोच रहा था की अगर वो सारे सिक्के उसके हो जाए तो वो और उसका परिवार हमेशा राजा की तरह रहेगा। मोती के मन में लालच आ चुका था. वह अपने भाई को जान से मर डालने की योजना बनाने लगा. कुंए के पास उसे एक धारदार हथियार मिला। उसने सोचा की वो इस हथियार से अपने भाई को मार देगा और घर में कहेगा की रास्ते में डाकुओं ने उन पर हमला किया। मोती को अपनी योजना पर गर्व हो रहा था.

वह पानी लेकर वापस पहुंचा और भाई पर मौका पा कर पीछे से वार कर दिया। उसका भाई वही पर कुछ देर में परलोक सिधार गया. मोती अब बहुत खुश था क्यूंकि सारे सोने के सिक्के अब उसके हो चुके थे. मोती ने अब खाना खा कर वापस घर लौट जाने का निश्चेय किया। सारे सोने के सिक्को को पास में रख मोती खाना खाने लगा. थोड़ा खाना खाते ही मोती के मुँह से खून आने आने लगा और वो तड़पने लगा. कुछ ही देर में उसकी भी तड़प तड़प कर मृत्यु हो गयी. मरते वक़्त मोती को एहसास हो चूका था की उसके बड़े भाई ने खाने में जहर मिला दिया था ताकि सारे सिक्के उसके बड़े भाई के हो जाएँ।

अब दोनों भाई मृत पड़े थे और वो थैला जिसे हम मायारूपी डायन भी कह सकते हैं वो वही पर अब भी वैसे ही पड़ी हुई थी. जी हाँ दोस्तों उस साधू ने एक दम ठीक कहा था की आगे डायन है. वो सिक्कों से भरा थैला उन दोनों भाइयों के लिए डायन ही साबित हुआ. ना वो डायन रूपी थैला वहां होता न ही वो दोनों भाई एक दूसरे की जान लेते।

दोस्तों! यही जीवन का सच भी है. हम माया में इतना उलझ जाते हैं की अपने रिश्ते-नातों तक को भुला देते हैं. माया रूपी डायन आज हर घर में बैठी है. इसी माया के चक्कर में इंसान हैवान बन बैठा है. हमें इस प्रेरक कहानी से ये सीख लेनी चाहिए की हमें माया का केवल उपभोग करना होता है. ये कभी भी हमारे रिश्तों के बीच में नहीं आनी चाहिए।

इसी को लेकर हमारे पूर्वजों ने एक कहावत कही थी" माया के चक्कर में दोनों गए, न माया मिली न राम"

हाँ दोस्तों।जो माया के चक्कर में एक दूसरे को मार डालने तक को तैयार रहते हैं, ऐसे लोगों ना तो भगवान् को अच्छे लगते है और ना ही माया इन लोगों को मिल पाती है.  तो दोस्तों कभी भी लालच ना करें और धन के पीछे उतना ही भागे जितने में आपकी ज़रूरते पूरी हो सके. इंसान का खुश रहना ही सबसे जरुरी है. अगर आपका मन खुश है और आपके परिवार में खुशाली है तो इससे बड़ा धन आपके लिए कुछ भी नहीं है. ईश्वर को याद करें और अपनी ज़िंदगी का एक घंटा ज़रूर अच्छे कामों को दें. फिर देखिएगा की आपके घर  में किस प्रकार रौनक आती है.

दोस्तों, आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में ज़रूर ज़रूर बताइयेगा। आपके कमेंट्स ही हमें और आगे लिखने के लिए प्रेरित करते हैं. ऐसी एक कहानी हर हफ्ते आपके लिए लाते रहेंगे। फ्रैंड्स हमारे ब्लॉग को आप दूसरों से ज़रूर शेयर करें। 

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