Sunday, September 30, 2018

फक्क्ड़बाज़ी: जीवन जीने का नायब रास्ता

                             फक्कड़बाज़ी: जीवन को अलग नजरिया देने का एहसास 

कुछ मित्र अक्सर पूछते हैं कि ये फक्कड़बाज़ी क्या है?

आज इसी बात को दिल से निकालने के लिए ब्लॉग लिखा है कि आखिरकार ये फक्कड़बाज़ी क्या है? सच बताऊं तो फक्कड़बाज़ी जिंदगी जीने का सबसे मस्त तरीका है या यूँ कहें कि जिंदगी है जिसे हम शायद कोने में किसी खूटी के सहारे टांगकर भूल चुके हैं और वो हर रोज़ हमारी राह ताकते ताकते बूढ़ी होती जा रही है|
हम सबका जीवन व्यस्त या यूँ कहें कि अस्त व्यस्त हो चुका है इसमें कोई दो राय नहीं| समाज के सपने, घर के सपने, दोस्तों के सपने, अपनों के सपने आदि आदि पूरे करने की होड़ और दौड़ में हमनें खुद के अंदर झांककर अपने सपनों को समझना छोड़ दिया है या जानबूझकर IGNORE करना शुरू कर दिया है|



Friday, September 28, 2018

SUCCESS STORY:गरीबी से सरकारी नौकरी तक का सफर

        SUCCESS STORY:गरीबी से सरकारी नौकरी तक का सफर

आज हम लाये हैं एक बहुत ही मोटिवेशनल और एक खास इंसान की सक्सेस स्टोरी। ये कहानी पढ़ने के बाद आप बहुत ही प्रेरित महसूस कहेंगे। यहाँ हम प्रसिद्ध लोगों की सक्सेस स्टोरीज डालने की जगह बहुत ही आम लोगों की सक्सेस स्टोरीज डालेंगे। ये वो लोग होंगे जो अपनी मेहनत के दम पर आम से ख़ास बने. आप अपने आस पास के लोगों, या मित्रों की ऐसी ही सफलता की कहानी हमें भेज सकते हैं जिसे हम अपने ब्लॉग पर नाम और फोटो के साथ पोस्ट करेंगे। ऐसे सभी लोग हम सब के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं जिंहोने जीवन की अनंत कठनाइयों का सामना करने के बावजूद भी एक मुकाम पाया और कुछ कर दिखाया।

आज हम जिस इंसान की कहानी बताने जा रहे हैं उनका नाम और अरुण कुमार हैं. अरुण जी आज भारतीय जीवन बीमा निगम(एल.आई.सी.) में विकास अधिकारी के पद पर कार्यत है. तो आइये दोस्तों जानते हैं इनके जीवन की सफलता की कहानी।




Wednesday, September 26, 2018

प्रेरक कहानी: माया रूपी डायन

           कहानी: लालच में-"न माया मिली न राम"  
दोस्तों आज हम आपके लिए एक प्रेरणा से भरपूर कहानी ले कर आये हैं. इसे आप स्वयं भी पढ़िए तथा अपने परिवार के साथ भी शेयर करें।

किसी गाँव में दो भाई रहते थे. बड़े भाई का नाम हीरा था और छोटे भाई का नाम मोती था. दोनों भाइयों बहुत प्यार था. घर में भी खुशहाली थी. उस साल गाँव में आकाल पड़ गया. पूरा गाँव आकाल से त्राहि-माम कर रहा था. हीरा मोती का घर भी जैसे तैसे गुजारा कर रहता। हीर  और मोती से अपने घर की हालत देखी न गयी. दोनों ने विचार विमर्श कर के शहर की ओर जाने का फैसला किया। अपने घर से रास्ते का खाना पीना ले कर दोनों शहर की ओर चल पड़े.



Tuesday, September 25, 2018

तेरी यादें- अपने सनम की याद में: एक कविता

                                                                तेरी यादें 
Hi Doston! ज़िंदगी में प्यार बहुत ही आवश्यक है. हमारी अपनी संस्कृति हमें प्यार करना सिखाती है. विभिन्नता में एकता वाला देश है हमारा! अनेक धर्म और भाषाओँ के बावजूद हमें प्यार ही है जो एक साथ बांधे रखता है. हर इंसान अपनी ज़िंदगी में किसी न किसी से तो प्यार करता ही है. प्यार के ऊपर न जाने कितने किस्से बने है और ना जाने कितनी कहानियां। अपना बॉलीवुड भी सदा प्यार के रंगों में रंगा रहा है.

बड़े बड़े गीतकारों ने प्यार पर एक से एक गाने लिखे। गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ में उन्हें गया. कुछ गाने तो हमारे इतने करीब हो जाते हैं की हम जब उनको गाते हैं तो होने प्रीतम की यादों में खो जाते हैं. यहाँ अगर संगीतकारों की बात न की जाए तो बड़ी बेईमानी होगी। संगीत ही होता है जो को एक गाने को प्यार भरा अंदाज़ देता है. कुछ कलाकार प्यार को इतने अच्छे से दर्शाते हैं की वो प्यार के आइकॉन ही बन जाते हैं.

अब कविताएं एक अलग ही रूप होती हैं प्यार का. कविता अगर प्यार पर हो तो आप के मन पर कोमल असर छोड़ जाती है. अपनी प्रीतम की तारीफ, याद, बेवफाई पर आज तक हज़ारों कविताये लिखी गयी हैं. बहुत बड़े बड़े कवियों ने अपनी लेखनी से प्यार के शब्दों को सुसज्जित किया है. 

यहाँ दोस्तों मैं खुद की लिखी एक कविता " तेरी यादें " आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. आशा करता हूँ आपकी मेरी लेखनी पसंद आएगी। भाषा यहाँ हिंदी रहेगी।


Monday, September 24, 2018

चाणक्य के पांच जीवन बदल देने वाले वाक्य

          चाणक्य के ये पांच वाक्य हर किसी को ज़रूर अपनाने चाहिए 

चाणक्य का नाम हम भारत वासियों के लिए नया नहीं है. इनका बुद्धि, राजनीति और चालाकी में कोई भी प्रतिद्वंदी नहीं था. इनके किस्से दूर दूर तक मशहूर थे. ये अपने राजा को किसी भी समस्या की ऐसी युक्ति देते थे की विरोधी चारो खाने चित्त हो जाते थे. उनकी लिखी हुई किताब चाणक्य नीति बहुत ही मशहूर है. इसमें  चाणक्य जी खुद कहते हैं की "मैं लोगों की भलाई की इच्छा से (राजनीति के ) ग़ूढ रहस्यों से पर्दा उठा रहा हूँ, जिन्हे जान लेनें  मात्र से मनुष्य सर्वज्ञ हो जाता है अर्थात और कुछ जानना उसके लिए शेष नहीं रह जाता".  

दोस्तों, हम भी अपने जीवन के लिए चाणक्य से बहुत कुछ सीख सकते हैं. चाणक्य नीति से बहुत कुछ अपने जीवन के लिए भी सीखा जा सकता है. आप इनकी किताब को एक बार तो ज़रूर पढियेगा. इससे आपको अपने करियर के लिए तो बहुत कुछ सीखने को मिलेगा ही, और रिश्ते नाते, मित्रता इत्यादि की समझ आपको ज़रूर मिलेगी।

यहाँ मैं आपके लिए चाणक्य नीति से पांच जीवन  बदल देने वाले वाक्य समझाने वाला हूँ.  दोस्तों अगर आप इन्हे समझेंगे तो पक्का ही आपको अपने जीवन के बारे में एक नया नजरिया मिलेगा और आपकी सोच को एक नया आयाम भी मिलेगा।



Sunday, September 23, 2018

कैसे रहे अपनी जॉब से खुश

                                            कैसे रहें  अपनी जॉब से खुश
HI DOSTON! अगर मैं भारत देश की बात करूँ तो आज भी यहाँ सिर्फ नौकरी को ही वरीयता दी जाती है. आज भी माँ बाप अपने बच्चो को सिर्फ इस लिए पढ़ाते हैं की पढ़ लिख कर उसकी एक अच्छी सी नौकरी लग जाए. और ये गलत भी नहीं है. आखिर हर माता-पिता चाहते हैं की उनके  बच्चो की लाइफ SECURE रहे. जॉब सिक्योरिटी बहुत ज़रूरी है. पहली PREFERENCE सरकारी नौकरी को ही दी जाती है. सरकारी नौकरी अपने देश में हर चीज़ से बढ़कर है. बहुत से लोग अपनी नौकरी से खुश रहते हैं तो बहुत से नहीं। पर हर कोई इसके सहारे अपनी ज़िंदगी काटने का लक्ष्य बना लेता है. कुछ लोग हँसते हँसते तो कुछ मज़बूरियों के कारण। यहाँ हम बात करेंगे की कैसे हम अपनी जॉब से खुश रहे.

ये बहुत ज़रूरी है की आप हर हाल में खुश रहने की आदत डालें। क्यूंकि  आप अगर प्रसन्न नहीं रहेंगे तो आप न अपनी जॉब से न्याय कर पाएंगे और न ही अपने परिवार को खुश रख पाएंगे। अगर आप अपने परिवार के मुखिया हैं तो आपको हर हाल में बैलेंस बना के चलना होगा। तभी आप एक आदर्श ज़िंदगी जी पाएंगे। दोस्तों यहाँ मैं बहुत बड़ी बड़ी बातें नहीं बताने वाला और न ही मैं किसी किताब से पढ़ी पढ़ाई बाते बताने वाला हूँ. यहाँ मैं अपने अनुभव से बहुत SIMPLE पांच बाते आपको बताना चाहता हूँ .
 तो दोस्तों नीचे दिए पांच तरीकों से आप अपनी जॉब से खुश रह सकते हैं.




Saturday, September 22, 2018

ज़िंदगी- सोच सोच का फ़र्क़

                             ज़िंदगी- सोच सोच का फ़र्क़ 


दोस्तों, यूँ तो ज़िन्दगी जीने के  कई तरीके होते है, पर वो अलग ही होते है, जो ज़िंदगी को शिद्दत से जीते है. वो आनंद मूवी का एक  डायलॉग है न की "ज़िंदगी बड़ी होनी  चाहिए लम्बी नहीं", एक दम सच्ची बात है. कुछ लोग इस दुनिया में आते है जो अल्प आयु होते हैं, लेकिन सदियों तक दुनिया उन्हें याद रखती है. स्वामी विवेकानंद और मुंशी प्रेमचंद इसके बेमिसाल EXAMPLES हैं. कुछ लोग ज़िंदगी को कोस कोस के काटते है. आप जब भी ऐसे लोगो से मिलोगे तो वो 50 समस्या अपनी लाइफ की आपको गिना देंगे। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनसे  मिलकर ही आप में एक  नयी ऊर्जा का संचार हो जाता है. टेंशन हर किसी की लाइफ में है दोस्तों और ये सदा आपके साथ रहेंगी, पर आपको इन्हे कैसे हैंडल करना है, ये आपके विवेक और समझ पर निर्भर करता है. लाइफ को लेकर आपकी सोच कैसी है, यही तय करती है की आपका जीवन कैसा होगा।

नीचे 5 इम्पोटेंट पॉइंट्स को अपनाकर आप अपने जीने की सोच को ले कर एक नया नजरिया पा सकते हैं. 




Friday, September 21, 2018

बचपन-एक कविता

                                                             बचपन-एक कविता 

दोस्तों, आज कल की भागती दौड़ती ज़िंदगी में दो पल सुकून के निकाल पाना बहुत ही कठिन है. कब सुबह से शाम हो जाती है और शाम से सुबह पता ही नहीं चलता। ऐसे में कुछ भी लिखने पढ़ने के लिए वक़्त निकालना मुश्किल होता है. पर जीवन  को नया आयाम देने के लिए ये सब बहुत जरुरी है.

याद कीजिये अपना बचपन जब हम कितने बेबाक होते थे. हमारी खुसी सिर्फ एक टॉफी या पतंग तक ही सीमित होती थी. हमें तब छोटी छोटी चीज़ों में बड़ी बड़ी खुशियां मिलती थी, और अब हम बड़ी बड़ी चीज़ों में छोटी छोटी खुशियां ढूढ़ते रहते है. दो पल रुक कर याद कीजिए दोस्तों की लास्ट टाइम आप खुश कब हुए थे. पूरे मन से. याद आया? सोचना पड़ा ना!

आज नीचे अपनी कलम से लिखी एक कविता से आपको पुराने दिनों  में ले जाने का प्रयास है!




जीते तो बचपन में थे,
अब तो जिंदगी काटा करते  हैं,
नींद तो माँ की गोद में आती थी,
अब तो बस सो जाय करते हैं,
दोस्त तो बचपन में थे,
अब बस काम निकाला करते हैं,
तब रिश्तों नातों की समझ न थी,
अब सब समझ के निभाया करते  हैं,
तब हर वक़्त हंसी होठों पर थी,
अब बस मुस्कुरा दिया करते हैं,
त्यौहार तो बचपन मनाया करते थे,
अब तो बस दिन काटा करते हैं,
तब पटाखे फोड़ा करते थे,
अब तो बस देख के मुस्कुराया करते है,
माँ की लोरी में जो एहसास था,
अब एयर फोन लगाने में वो एहसास कहाँ,
अकड़ बक्कड़ में जो बात थी,
वो गूगल प्ले के डाउनलोड में कहाँ,
तब जमीन पर लेट कर ,
रात में आसमान निहारा करते थे,
आज फ्लैट के सातवीं मंज़िल से,
ज़मीन को निहारा कतरे हैं,
कभी ना खत्म होने वाली इस दौड़ में,
ना जाने कैसे शामिल हुए हम,
जीते जीते बहुत दूर निकल आये हम,
अपने बचपन को ना जाने कहाँ छोड़ आये हम 
-धर्मेंद्र  प्रसाद 

दोस्तों आपको हमारी ये कवित कैसी लगी हमें कमैंट्स में जरूर बताइयेगा
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Wednesday, September 19, 2018

FIRST POST

                                                 FIRST POST-WELCOME
दोस्तों, बातों का आशियाना एक मोटिवेशनल BLOG होने के साथ साथ एक जानकारी से परिपूर्ण वेबसाइट है. यहाँ आपको नित प्रतिदिन नयी नयी रोचक जानकारियां मिलेगी। आकर्षक काव्य और मधुर कवितायेँ भी पढ़ने  को मिलेंगी. यहाँ आपके जीवन के कुछ पलों को सुकून देने की कोशिश रहेगी। आपका  आपके  ब्लॉग पर हार्दिक स्वगत है.


दोस्तों यहाँ रोज़ एक पोस्ट आएगी. आशा है हमारा ये प्रयास आपको अच्छा लगेगा।
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