Friday, September 18, 2020

PAYTM APP REMOVED FROM GOOGE PLAY STORE.

             पेटीम एप को गूगल प्ले स्टोर से हटाया गया.

 

                      पेटीम ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है  

आज google ने अपने  play store  से   PAYTM APP  को हटा दिया है. Google  ने  PAYTM APP  को क्यों हटाया  इसका कारण अभी पता नहीं चल सका है.  गूगल ने PAYTM के  दूसरे APP  PAYTM  FOR  BUSINESS , PAYTM  MONEY  और PAYTM MALL को नहीं हटाया है. 





बहुत से लोग TWITTER  पर GOOGLE  से पूछ रहे हैं की उसने ऐसा क्यों किया। 

दोस्तों  GOOGLE ने PAYTM APP को क्यों REMOVE किया ये तो वक़्त आने पर ही पता चलेगा। पर ये बात किसी से छुपी नहीं है की PAYTM एक बहुत बड़ी COMPANY बन चुकी है जो GOOGLE के अपने MONEY TRANSFER APP  GOOGLE PAY से यूजर के मामले में कहीं आगे थी. हो सकता है भारत में WALLET APP के यूजर की संख्या बढ़ाने के लिए गूगल ने ये कदम उठाया हो. 

कारण की जानकारी होते ही हम आपको जरूर बतायंगे।  

Tuesday, October 23, 2018

जीवन पर एक कविता

दोस्तों आज हम आपके लिए लाएं हैं ज़िंदगी पर एक कविता। ये कविता मैंने जीवन के मूल्यों को ध्यान में रख कर लिखी है. जीवन वैसे भी एक कविता समान है, जिसकी अगर शुरुआत होती है तो अंत भी ज़रूर होता है. हम सब माटी के पुतले हैं. हमारा कोई मूल्य नहीं है. ये जीवन की कड़वी सच्चाई है. ये सभी बाते हम सभी को पता हैं पर हम जीवन की भाग दौड़ में भूल जाते है.  इस कविता को पढ़ कर बेशक आपको अच्छा लगेगा। आपका अपना धमेंद्र।

दोस्तों आपसे विनम्र निवेदन हैं मेरे इस ब्लॉग को अपने मित्रों के साथ ज़रूर शेयर करें। इससे हमें आपके लिए नयी पोस्ट लिखने के लिए ऊर्जा मिलती है.




ज़िंदगी- आपधापी का नाम.

इस आपाधापी भरे जीवन से,
भर गया मन हर मंजर से,
यहाँ सुबह भी भागती सी है,
रात भी जागी जागी सी है,
सुकून भी यहाँ सुकून ढूंढ़ता हैं,
एहसास भी यहाँ एहसास से खाली है,
अंधी दौड़ ये पथ रहित ही है,
हर अभिलाषा खोई खोई सी है,
किताब के चार अक्षर याद कर के,
ज़िंदगी का सार ही भुला बैठे हम,
क्या पाना है कहाँ जाना है,
इस सावल का न कोई ठिकाना है,
यंत्रों में उलझ कर हम यंत्र हुए,
महत्वकांक्षा की आग में सब जल रहे,
बड़ी बड़ी इमारतों में हम आ गए,
छोटी छोटी खुशियाँ पीछे छोड़ आये,
पर्व भी आज कल सिर्फ यंत्रों में ही मनते हैं,
लोगों को सामने देख चेहरा ही छुपा लेते हैं,
कहने को छू लिया आज हमने चाँद, पर,
ठीक से जमीन पर चलना न आया हमें,
ये इंसानी चोले में कौन है समाया,
खुदा ने इंसान ऐसा तो नहीं था बनाया,
क्यों हम आज रगड़े झगडे में पड़े रहते हैं,
हर वक़्त एक दूसरे को काटने में लगे रहते हैं,
भूल गया इंसान खाली आया था खाली जायेगा,
मुट्ठी में भर के एक तक तिनका ना ले जा पायेगा,
अभी वक़्त है संभल जा ऐ इंसान,
नहीं तो आएगा कुदरत का तूफ़ान,
न तू बचेगा न तेरी हस्ती,
धरी की धरी रह जायेगी सारी तेरी पूंजी।
-धर्मेंद्र 

दोस्तों आपको हमारी ये कविता किसी लगी कमैंट्स में ज़रूर बताइयेगा।









Friday, October 19, 2018

HAPPY DASHEHRA




बातों का आशियाना के सभी पाठकों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें।






आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाये। राम जी के आदर्शों पर चलें और मर्यादित जीवन जीए. अपने अंदर के बुराई रूपी रावण को मारें और सदा खुश रहे.

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